लुधियाना, 11 सितंबर 2026 (संजीव आहूजा): नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर, अजय कुमार चौधरी ने 7वें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026 में मुख्य भाषण देते हुए कहा, “अगला फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर इतना स्मार्ट होना चाहिए कि वह मकसद को समझ सके, इतना प्रोग्रामेबल हो कि वैल्यू का तालमेल बिठा सके, भविष्य के खतरों का सामना करने के लिए इतना मज़बूत हो और इतना समावेशी हो कि हर नागरिक की सेवा कर सके।”
“विश्वास की संरचना: भुगतान से आगे बढ़कर इंटेलिजेंस और प्रोग्रामेबिलिटी की ओर” विषय पर बोलते हुए, चौधरी ने कहा कि वित्तीय प्रणाली ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहाँ प्रणालियाँ अधिक बुद्धिमान हो रही हैं, परिसंपत्तियाँ और लेन-देन अधिक प्रोग्रामेबल बन रहे हैं तथा डिजिटल ट्रस्ट की परिभाषा भी नए सिरे से तय हो रही है। उन्होंने आगे कहा, “अब सवाल यह नहीं है कि नई प्रौद्योगिकियाँ वित्तीय क्षेत्र को प्रभावित करेंगी या नहीं, बल्कि यह है कि हम इस बदलाव को कितनी प्रभावी ढंग से अपनाते हैं और जोखिमों पर नियंत्रण बनाए रखते हुए अवसरों का लाभ कैसे उठाते हैं।”
UPI के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर, चौधरी ने बताया कि अगस्त 2026 में अकेले UPI के माध्यम से 752 भागीदार बैंकों के जरिए 24.5 अरब से अधिक लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.8 लाख करोड़ रुपये रहा। उन्होंने कहा कि UPI अब महज एक भुगतान इंटरफेस नहीं रह गया है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित हो चुका है। उन्होंने इसका श्रेय राष्ट्रीय नेतृत्व को दिया, जिसने डिजिटल भुगतान को भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखा।उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के UPI को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने UPI को भारत की तकनीकी क्षमता और आत्मविश्वास की सबसे प्रभावशाली अभिव्यक्तियों में से एक बना दिया है।
वित्तीय बुनियादी ढांचे के भविष्य पर बात करते हुए, चौधरी ने तीन प्रमुख बदलावों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जो परिवर्तन के अगले चरण को निर्धारित करेंगे। उन्होंने कहा कि पहला बदलाव “निर्देशों से उद्देश्य की ओर” होगा, जहाँ एजेंटिक AI प्रणालियों को उद्देश्यों को समझने और अधिकृत दायरे में कार्य करने में सक्षम बना सकता है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि वित्तीय प्रणालियों में मानवीय अधिकार और नियंत्रण मूलभूत बने रहने चाहिए। उन्होंने कहा, “उद्देश्य असीमित मशीन स्वायत्तता नहीं, बल्कि सीमित और जवाबदेह एजेंसी होना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि NPCI, UPI इकोसिस्टम के भीतर डिजिटल एजेंट्स की पहचान और उन्हें अधिकृत करने के लिए प्रोटोकॉल की संभावनाओं पर काम कर रहा है, साथ ही इंटरऑपरेबिलिटी और सेटलमेंट की अंतिमता को बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
दूसरा बदलाव “पैसे के हस्तांतरण से मूल्य के समन्वय की ओर” होगा। प्रोग्रामेबिलिटी के माध्यम से धन या परिसंपत्तियों के हस्तांतरण को पहले से तय शर्तों से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने NPCI के ओपन-सोर्स एंटरप्राइज ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म, Drunix का उल्लेख किया, जिसे टोकनाइजेशन प्लेटफॉर्म, डिजिटल एसेट इकोसिस्टम और बहु-संगठन नेटवर्क को समर्थन देने के लिए विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि विखंडन को रोकने के लिए साझा मानक और इंटरऑपरेबिलिटी बेहद आवश्यक होंगे।
तीसरा बदलाव इस विश्वास से जुड़ा है कि धन अपना मूल्य बनाए रखेगा, लेन-देन निर्धारित तरीके से पूरा होगा, डेटा सुरक्षित रहेगा और किसी गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदारी तय की जा सकेगी। यह बदलाव “वर्तमान सुरक्षा से भविष्य की मजबूती की ओर” भी है। चौधरी ने आगाह किया कि क्वांटम कंप्यूटिंग में हो रही प्रगति के मद्देनजर वित्तीय संस्थानों को मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा के खतरे में पड़ने से काफी पहले ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की दिशा में बदलाव को “दीर्घकालिक और पूरे इकोसिस्टम से जुड़ा प्रयास” बताया, जिसमें बोर्ड, नियामक, बैंक, फिनटेक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ सभी शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि वास्तविक परिवर्तन तब सामने आएगा, जब इंटेलिजेंस, प्रोग्रामेबिलिटी और ट्रस्ट एक साथ मिलकर काम करेंगे। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि जैसे-जैसे ये प्रौद्योगिकियाँ एक-दूसरे के साथ जुड़ेंगी, वैसे-वैसे इनके जोखिम भी आपस में जुड़े हो सकते हैं। उन्होंने कहा, “मॉडल जोखिम भुगतान या आचरण संबंधी जोखिम में बदल सकता है, क्लाउड पर निर्भरता परिचालन और संप्रभुता से जुड़ी चिंताएँ पैदा कर सकती है और प्रोग्रामेबल शर्तों में होने वाली त्रुटियाँ सेटलमेंट संबंधी समस्याओं का रूप ले सकती हैं।”
संप्रभुता संबंधी जोखिम पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि वित्तीय संस्थानों को महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी पर अपना नियंत्रण और सार्थक विकल्प बनाए रखना चाहिए, किसी एक मॉडल, क्लाउड या प्रौद्योगिकी प्रदाता पर अत्यधिक निर्भरता से बचना चाहिए, विभिन्न प्रदाताओं के बीच पोर्टेबिलिटी बनाए रखनी चाहिए और नई प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारीपूर्वक लागू करने तथा उनकी निगरानी के लिए आवश्यक कौशल एवं संस्थागत क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “संप्रभुता अंततः नियंत्रण, क्षमता, विकल्प और तैयारी का संयोजन है।” उन्होंने आगे कहा कि “संप्रभु स्तर पर, इस मुद्दे पर क्षेत्रीय या वैश्विक सहयोग भी आगे बढ़ने का एक रास्ता है।”
अपने संबोधन का समापन करते हुए, चौधरी ने जोर देकर कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्य केवल कार्यक्षमता बढ़ाने में नहीं, बल्कि बेहतर निर्णय लेने में सक्षम बनाने, अधिक मजबूत लचीलापन सुनिश्चित करने, व्यापक समावेशन को बढ़ावा देने और समाज के लिए बेहतर परिणाम हासिल करने में निहित है। UPI के दस वर्ष पूरे होने पर उन्होंने NPCI के नेतृत्व और कर्मचारियों को बधाई दी तथा पिछले एक दशक में UPI की यात्रा में भारतीय रिजर्व बैंक और भारत सरकार के सहयोग को भी स्वीकार किया। आगे की राह पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “NPCI उभरती, स्केलेबल और समावेशी तकनीकी प्रगति में नेतृत्व प्रदान करना जारी रखेगा, ताकि कल की वित्तीय व्यवस्था को नए सिरे से परिभाषित किया जा सके।”
