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ग्लूटेन-फ्री डाइट हर किसी के लिए जरूरी नहीं; विशेषज्ञों ने संतुलित आहार में गेहूं की अहमियत बताई

डॉ. अमित बंसल
डॉ. अमित बंसल

लुधियाना, 17 अप्रैल 2026 (संजीव आहूजा)
: आजकल बहुत लोग यह मानने लगे हैं कि ग्लूटेन सेहत के लिए हानिकारक है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि बिना ज़रूरत ग्लूटेन-फ्री डाइट अपनाना सही नहीं है। ज्यादातर भारतीयों के लिए गेहूं आज भी संतुलित आहार का एक ज़रूरी हिस्सा है।

भारत में गेहूं रोज़ के खाने का मुख्य हिस्सा है। इसमें शरीर को ऊर्जा देने वाले कार्बोहाइड्रेट्स, फाइबर और बी-विटामिन भरपूर मात्रा में होते हैं। इसमें थोड़ा प्रोटीन भी होता है, जिसे ग्लूटेन कहते हैं, जो आटे को लचीला बनाता है और रोटी व ब्रेड को सही आकार देता है। अगर सही मात्रा में खाया जाए, तो साबुत गेहूं पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

पिछले कुछ सालों में ग्लूटेन को लेकर काफी भ्रम फैला है और कई लोग बिना किसी बीमारी के इसे अपने खाने से हटा रहे हैं। लेकिन मेडिकल रिसर्च के अनुसार, ज्यादातर लोगों के लिए ग्लूटेन सुरक्षित है। बिना वजह इसे हटाने से शरीर में फाइबर और ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिससे पाचन और सेहत पर असर पड़ सकता है।

डॉ. अमित बंसल, सीनियर कंसल्टेंट, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, फोर्टिस हॉस्पिटल लुधियाना के अनुसार, “आजकल ट्रेंड्स की वजह से लोग ग्लूटेन को नुकसानदायक मान लेते हैं, जबकि ज्यादातर लोगों के लिए यह पूरी तरह सुरक्षित है। बिना डॉक्टर की सलाह के इसे छोड़ने से शरीर में पोषण की कमी और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।”

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लूटेन से परहेज केवल कुछ खास बीमारियों में ही जरूरी होता है।

सीलिएक डिज़ीज़ एक ऐसी बीमारी है जिसमें ग्लूटेन खाने से छोटी आंत को नुकसान होता है और शरीर पोषक तत्व ठीक से नहीं ले पाता। ऐसे मरीजों को डॉक्टर की सलाह से जीवनभर ग्लूटेन-फ्री डाइट लेनी पड़ती है।

एक और स्थिति होती है, जिसे नॉन-सीलिएक ग्लूटेन सेंसिटिविटी कहते हैं। इसमें ग्लूटेन खाने के बाद पेट फूलना या दर्द जैसे लक्षण होते हैं, लेकिन आंत को नुकसान नहीं होता। ऐसे मामलों में डॉक्टर जांच के बाद डाइट में बदलाव की सलाह देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कोई बीमारी नहीं है, तो ग्लूटेन को खाने से हटाने की कोई जरूरत नहीं है। गेहूं और उससे बने खाद्य पदार्थ संतुलित और पौष्टिक आहार का जरूरी हिस्सा हैं।
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