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| डॉ. मानव वढेरा |
लुधियाना, 15 जनवरी, 2026 (संजीव आहूजा): सर्दियां भले ही सुहावनी लगें, लेकिन यह दिल पर चुपचाप दबाव डाल सकती हैं। हर साल ठंड के मौसम में दिल से जुड़ी आपात स्थितियों में साफ़ बढ़ोतरी देखी जाती है। सर्दियों में हार्ट अटैक और हार्ट फेल्योर के मामले ज्यादा सामने आते हैं। अध्ययनों के अनुसार, सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा गर्मियों की तुलना में लगभग दोगुना होता है। यह जोखिम बुज़ुर्गों और उन लोगों में अधिक होता है जिन्हें पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या मधुमेह है।
फोर्टिस हॉस्पिटल, लुधियाना में नॉन-इनवेसिव कार्डियोलॉजी के एसोसिएट कंसल्टेंट डॉ. मानव वढेरा कहते हैं: “ठंडा मौसम दिल पर लगातार और चुपचाप दबाव डालता है। रक्त वाहिकाओं का सिकुड़ना, रक्तचाप का बढ़ना, खून का गाढ़ा होना और मौसमी संक्रमण—ये सभी मिलकर हृदय संबंधी जोखिम को बढ़ाते हैं। खतरा तब और बढ़ जाता है जब लोग लक्षणों को हल्के में लेते हैं या इलाज में देरी करते हैं, खासकर वे लोग जिन्हें पहले से हृदय की समस्या है।”
तापमान गिरने पर शरीर को गर्म रखने के लिए रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे रक्तचाप बढ़ता है और दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक ऐसा होने से दिल कमजोर हो सकता है और हार्ट फेल्योर का खतरा बढ़ जाता है। सर्दियों में खून भी गाढ़ा हो जाता है, जिससे थक्के बनने की संभावना बढ़ जाती है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का जोखिम बढ़ता है।
सर्दियों में लोगों की दिनचर्या भी बदल जाती है। शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है और भारी भोजन अधिक किया जाता है। सूप, अचार और प्रोसेस्ड स्नैक्स जैसे आरामदेह खाद्य पदार्थों में नमक की मात्रा अधिक होती है। ज्यादा नमक शरीर में पानी रोकता है, जो हृदय रोगियों के लिए नुकसानदायक है। धूप कम मिलने से विटामिन डी का स्तर भी कम हो सकता है, जो समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
सर्दियां फ्लू और निमोनिया का भी मौसम होती हैं। ये संक्रमण बुखार, सांस लेने में दिक्कत और सूजन पैदा करते हैं, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और गंभीर हृदय समस्याएं हो सकती हैं।
सर्दियों में हृदय जोखिम क्यों बढ़ता है
- ठंड के कारण रक्त वाहिकाएं सिकुड़ती हैं और रक्तचाप बढ़ता है
- खून गाढ़ा हो जाता है, जिससे थक्के बनने का खतरा बढ़ता है
- शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है
- अधिक नमक और वसायुक्त भोजन से शरीर में पानी जमा होता है
- फ्लू और निमोनिया दिल पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं
इन चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें
- अचानक वजन बढ़ना
- पैरों में सूजन या चेहरे पर फुलाव
- हल्की गतिविधि में भी सांस फूलना
- सीने में भारीपन या जलन, जिसे अक्सर अपच समझ लिया जाता है
सर्दियों में दिल को सुरक्षित रखने के उपाय
- हल्के गर्म कपड़े पहनें और सिर व गर्दन को ढककर रखें
- घर के अंदर व्यायाम, स्ट्रेचिंग या योग से सक्रिय रहें
- कम नमक और कम वसा वाला संतुलित आहार लें
- हृदय और रक्तचाप की दवाएं नियमित रूप से लें
- सर्दियों में रक्तचाप की जांच अधिक बार कराएं
- डॉक्टर से नियमित रूप से मिलें, क्योंकि दवाओं की मात्रा में बदलाव की जरूरत हो सकती है
सर्दियों में होने वाली अधिकांश हृदय आपात स्थितियां रोकी जा सकती हैं। गर्म रहें, समझदारी से खाएं, सक्रिय रहें और समय पर डॉक्टर की सलाह लें, ताकि जोखिम कम किया जा सके और जीवन बचाया जा सके।
